रॉबर्ट बॉयल जी की शिक्षा पर चर्चा!

रॉबर्ट बॉयल का जन्म, 26 जनवरी, 1627 के दिन आयरलैंड के मुंस्टर शहर में हुआ था। वे कॉर्क के अतिसमृद्ध, अतिसम्पन्न अर्ल की 14वीं संतान, एवं 10वें पुत्र थे। उनकी अद्भुत प्रतिभा के सम्बंध में कभी भी किसी को संदेह नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त उन्हें वे सारी सुविधाएं यूं ही प्राप्त थीं जो एक सुलझा हुआ और सम्पन्न बाप अपने बेटे के लिए जुटा सकता है। अंग्रेजी के साथ-साथ उन्होंने लैटिन और फ्रेंच का अध्ययन किया और, आगे चलकर, अपनी इस बढ़ती भाषा-सम्पदा में हिंबू, ग्रीक और सीरियैक का समावेश भी कर लिया। इस सबका परिणाम यह हुआ कि बाइबल का गम्भीर अध्ययन वे उसकी मूल भाषाओं के माध्यम से करने में सफल रहे। 8 साल की उम्र में वह ईटन कालिल में दाखिल हुए। ईटन उन दिनों इंग्लैंड की प्राथमिक पाठशालाओं में सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध विद्यालय था। तीन साल बाद उनका स्कूल छुड़वा दिया गया, ताकि वे महाद्वीप यूरोप की यात्रा कर आएं। इंग्लैंड का एक श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए यह यात्रा भी उस युग में आवश्यक समझी जाती थी। तब विद्यार्थी के लिए एक प्रकार से यही ‘दीक्षान्त’ हुआ करता था। किंतु उसके लिए ग्यारह साल की उम्र आमतौर पर काफी नहीं होती। 1641 में 14 साल के रॉबर्ट इटली पहुंचे और वहां वह प्रख्यात वैज्ञानिक गैलीलिओ के सम्पर्क में आए।उन्होंने निश्चय कर लिया कि अब वह अपना जीवन विज्ञान के अध्ययन को ही अर्पित कर देंगे!

बॉयल एक उदारहृदय व्यक्ति थे और उन्होंने ‘बॉयल्ज लॉ’ का आविष्कार न भी किया होता, तब भी इतिहास के अमर पुरुषों में उनका नाम सदा स्मरण किया ही जाता क्योंकि न्यूटन के ‘प्रिन्सीपिया’ के प्रकाशन की व्यवस्था उन्होंने ही पहले-पहल की थी! 30 दिसम्बर, 1691 को लंदन में उनकी मृत्यु हुई। उनकी उम्र तब 64 साल थी। अंधविश्वासों और चुडैलों के उस जमाने में भी उन्होंने विज्ञान में कुछ महत्त्वपूर्ण दिशाएं और प्रणालियां प्रस्तुत की और अपने समकालीन कितने ही वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा एवं अर्थ की दृष्टि से सचमुच एक स्रोत बन गए। वे लोग कहा भी करते थे–‘रॉबर्ट बॉयल तो सत्य को, जैसे, सूंघ ही लेते हैं!


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