बेंजामिन फ्रांकलिन जी की शिक्षा पर चर्चा करिए!

बेंजामिन फ्रैंकलिन का जन्म 17 जनवरी, 1706 में बोस्टन शहर में हुआ था। वे एक साबुन और मोमबत्ती निर्माता के पुत्र थे। उनके 17 भाई-बहन थे और वे इन बच्चों में छठवें बच्चे थे। उनके पिता मोमबत्तियां बनाने का कार्य करते थे। वे अमरीका के सुप्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, दार्शनिक और पत्रकार रहे लेकिन शायद वैज्ञानिक के रूप में आज उन्हें अधिक लोग जानते हैं। विद्युत के क्षेत्र में किए गए प्रयोगों के लिए उनका नाम आज भी संसार भर में प्रसिद्ध है। फ्रैंकलिन की शुरुआती जिंदगी संघर्षों की एक महागाथा है। अनेक संघर्षों से गुजरते हुए उन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में मिस्त्रियों और व्यापारियों में बाद-विवाद संस्था जैसी एक संस्था भी स्थापित कर दी!

यही संस्था बाद में आगे चलकर ‘अमरीकन फिलॉसोफिकल सोसायटी’ के रूप में परिणत हो गई। अपनी योग्यता के बल पर 1753 में वे पोस्टमास्टर जनरल नियुक्त किए गए। उस समय विश्व की बहुत-सी ऊंची इमारतें बादलों से बिजली गिरने से नष्ट हो जाती थीं। ऊंचे भवनों को बादलों की तड़ित से सुरक्षा प्रदान करने का साधन सर्वप्रथम बेंजामिन फ्रैंकलिन ने खोजा। विद्युत से सुरक्षा प्रदान करने वाले इस प्रक्रम को तड़ित चालक (Lighting Conductors) कहते हैं। तड़ित चालक के इस आविष्कार की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है।!


सन् 1752 की बात है जब बेंजामिन फ्रैंकलिन ने बादलों की विद्युत से सम्बंधित एक प्रयोग किया जो इस प्रकार था—फ्रैंकलिन ने यह भी सिद्ध किया कि जिन मकानों में रोशनदानों और खिड़कियों की उचित व्यवस्था नहीं होती, वहां रोग तेजी से फैलते हैं। उन्होंने यह भी साबित करके दिखाया कि अम्लीय जमीन को चने के प्रयोग के द्वारा ठीक किया जा सकता है। बेंजामिन फ्रैंकलिन ने अपने आविष्कारों का पेटेंट लेने से सदा ही इन्कार किया। उनके इन वैज्ञानिक कार्यों के फलस्वरूप उन्हें बहुत से सम्मान प्राप्त हुए। लंदन की रॉयल सोसायटी ने भी उन्हें अपने सदस्य के रूप में सम्मानित किया। वैज्ञानिक के अतिरिक्त वे एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ भी रहे। उन्होंने अमरीका के स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा योगदान दिया। वे उपनिवेशों के उन पांच राजनीतिज्ञों में से एक थे, जिन्होंने 4 जुलाई, 1766 को प्रसिद्ध घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।इसी से संयुक्त राज्य अमरीका की नींव पड़ी थी। सन् 1787 में संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान के निर्माण में भी उन्होंने महान योगदान दिया। विज्ञान और राजनीति की सेवा करते हुए इस महान पुरुष की 17 अप्रैल, 1790 में मृत्यु हो गई!


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