आर्किमिडीज जी की शिक्षा दीक्षा पर चर्चा!

विशिष्ट गुरुता’ के सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले इस महानतम् वैज्ञानिक का जन्म ईसा से लगभग 287 वर्ष पहले सिसली के सिराक्यूज द्वीप में हुआ था! उनके पिता ग्रीक के महानतम् ज्योतिर्विद फीडिपाज थे! आर्किमिडीज की शिक्षा-दीक्षा अलेक्जेण्ड्रिया के प्रसिद्ध ‘गणित विद्यालय में सम्पन्न हुई! आर्किमिडीज के आचार्य थे यूक्लिड के एक परम्परा शिष्य, सामोस के महानतम् गणितज्ञ सेनो! ग्रीक में उन दिनों विशुद्ध मानसिक चिंतन द्वारा निष्कर्ष प्राप्त करने की परम्परा थी और आर्किमिडीज एक महानतम चिंतक थे! हालांकि कुछ विद्वानों का मानना है कि उन्होंने निश्चित रूप से चिंतन के साथ-साथ विशिष्ट गुरुता’ के सिद्धांतों तक पहुंचने के लिए कुछ प्रयोग भी अवश्य किए होंगे। वैसे इस सिद्धांत के प्रतिपादन की कहानी है बहुत रोमांचक!सिराक्यूज का राजा हीरों द्वितीय अपनी हर विजय को किसी न किसी देवता पर कोई भेंट चढ़ाकर मनाया करता था। कहा जाता है कि एक विजय को मनाने के लिए उसने एक देवता को स्वर्ण मुकुट भेंट करने का निश्चय किया। मुकुट बनाने के लिए एक कुशल स्वर्णकार नियुक्त किया गया!

राजा मुकुट को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया लेकिन उसे यह संदेह था कि सुनार ने उसमें चांदी की कुछ मिलावट की है। राजा उसे बिना तोड़े ही अपने संदेह की जांच कराना चाहता था। उसने प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्किमिडीज को बुलाया और कहा कि मुकुट को बिना तोड़े ही उसमें मिलावट का पता लगाया जाए! विज्ञान का शायद ही कोई ऐसा छात्र होगा, जिसने आर्किमिडीज का नाम न सुना हो। आर्किमिडीज अपने समय के एक महान वैज्ञानिक थे। आज 2000 वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी इस वैज्ञानिक द्वारा किए गए आविष्कारों को विज्ञान में प्रयोग किया जाता है। इससे पता चलता है कि वे कितने महान थे! युद्ध के बाद जब ईसा पूर्व 212 सदी में सिराक्यूज रोम के कब्जे में आ गया तो आर्किमिडीज बहुत दुखी हुए!

एक दिन वे घर में बैठे जब जमीन पर कुछ ज्यामितीय आकृतियां बना रहे थे तो उनके घर के बाहर घोड़ों की टापों की और हथियारों के टकराने की आवाजें हुईं! तभी एक सशस्त्र रोमन सिपाही उनके घर में घुस आया लेकिन वे अपने कार्य में इतने निमग्न थे कि उन्हें सिपाही के आने की खबर ही नहीं हुई। जब सिपाही आगे बढ़ा तो अचानक ही उनके मुंह से निकला ‘कृपया इन आकृतियों को मत बिगाड़िए।’ इससे पता चलता है कि उन्हें अपने अनुसंधान कार्यों से कितना लगाव था! पता नहीं सिपाही के मन में उस समय क्या आया कि उसने अपना भाला उनके शरीर में भोंक दिया और इस प्रकार इस महान वैज्ञानिक की निर्मम हत्या कर डाली! अंत में यह कहना अनुचित न होगा कि आर्किमिडीज गणित, भौतिकी, यांत्रिकी और खगोलशास्त्र के महान वैज्ञानिकों में से एक थे। कुछ वैज्ञानिकों का तो यहां तक मत है कि न्यूटन से पहले उनकी बराबरी करने वाला कोई दूसरा वैज्ञानिक नहीं था! उन्हें हम कभी भी न भुला सकेंगे!


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